Feb 20, 2026
vedon ki sansaar ke liye aavshyakta bhaag 3
वेदों की संसार के लिये आवश्यकता (गतांक से आगे – तीसरी क़िस्त)
कृण्वन्तो विश्वं आर्यम्
"आर्यसमाज के लब्धप्रतिष्ठ लेखक, दार्शनिक तथा साहित्यकार पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय का जन्म ६ सितम्बर १८८१ को एटा जिले के नदरई नामक ग्राम में श्री कुंजबिहारीलाल के यहाँ हुआ। इन्होंने अंग्रेजी तथा दर्शनशास्त्र में क्रमश: १९०५ तथा १९१२ में एम. ए. किया। प्रारम्भ में कुछ समय तक राजकीय स्कूलों में अध्यपान किया किन्तु १९१८ में वहाँ से त्यागपत्र देकर डी. ए. वी. हाई स्कूल इलाहाबाद में मुख्याध्यापक के पद आ गये। १९३६ में इस कार्य से अवकाश लेने के 'पश्चात् उपाध्यायजी ने स्वजीवन को आर्यसमाज के लिए ही समर्पित कर दिया। वे आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तरप्रदेश के प्रधान पद पर १९४१ से १९४४ पर्यन्त रहे। तत्पश्चात् सार्वदेशिक आर्यप्रतिनिधि सभा के उपप्रधान (१९४३) तथा मंत्री (१९४६ – १९५१) भी रहे। इसी बीच आप। धर्म प्रचारार्थ दक्षिण अफ्रीका, थाईलैण्ड एवं सिंगापुर गया।। १९५९ में दयानन्द दीक्षा शताब्दी के अवसर पर मथुरा में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्रप्रसाद की अध्यक्षता में आपका सार्वजनिक अभिनन्दन किया गया तथा अभिनन्दन ग्रन्थ भेंट किया गया। अत्यन्त वृद्ध हो जाने पर भी आप निरन्तर अध्ययन एवं लेखन में लगे रहे। २९ अगस्त १९६८ को आपका निधन हो गया।"
Feb 20, 2026
वेदों की संसार के लिये आवश्यकता (गतांक से आगे – तीसरी क़िस्त)
Feb 20, 2026
वेदों की संसार के लिये आवश्यकता (गतांक से आगे – दूसरी क़िस्त)